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ओ धरती के लाल

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16 -Jun-2019 nil Fathers Day Poems 0 Comments  140 Views
ओ धरती के लाल

ओ धरती के लाल
पूज्य पिता श्री चिरौंजी लाल जी
तुम्हारे आदर्श आकाश से नवल - धवल
सूरज के प्रकाश से /अनमोल धरोहर/:कैसे बांधू शब्दों में .:
आप थे धरती के लाल :चिरौंजीलाल
भोजन परोस पालतुओं को /ब्यालू से निपट
लिपे पुते चौतरे पर अलाव के आस पास
नीम दादा की छत्रछाया में आयोजित सभा में
स्वागत के बाद पूछते थे कुशल छेम
कानों से काम लेते थे शिकवा - शिकायत पर
सर आँखों पर बिउथाते थे सुझाव घर खेत खलिहान के

टटोलते /बढाते /बहलाते मन सबका
जब मान जाते सबके मन /मुंह कराके / तय करते भावी कार्यक्रम
नींद पड़ते ही सलाह देते नींद मारने की
सोते घोड़े बेचकर सबके साथ /पियाल पर सबके साथ पिताजी

भुईंसारे तरोताज़ा हो/ सानी देते थे बैल ,गाय ,भैसोंको
जगाते थे हल ,फावड़ा ,कुदाली को
सज धज कर पहुँच खेत खलिहान पर साजो सामान सहित
बहाते थे जमकर पसीना
हो जाता था तरबतर घर आँगन खेत का
बन जाते थे खुद ' खेत '
छोड़ते थे पीछा तब / जब शपथ खाकर करता था वादा
सोना उगलने का

ऐसे थे मेरे पिताश्री /भारत के किसानों के अप्रतिम उपमेय प्रतिमान
धरती के लाल श्री चिरौंजी लाल \
[भोपाल :05.०५.१९९८]



Dedicated to
allpublic

Dedication Summary
befitting for fathers-day.

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