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वो नवोदया ही अच्छा था !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  989 Views
PANKAJ CHOUREY

वो नवोदया ही अच्छा था
ये जवानी हार गयी नवोदया के दिन ही अच्छे थे
ये कॉलेज की पढ़ाई मर गयी
वो मोज मस्ती तो नवोदया की थी
जहा छटवी से लेकर बरहवी का साथ था
वो नवोदया स्कूल नहीं परिवार था
जहां सब एक दूसरे के लिए मरते थे
बिछडने का कोई गम नहीं और खुशी के पल साथ जिया करते थे
फिर यूं निकले नवोदया के दिन की
फिर शुरुआत कॉलेज की हुई
नऐ दोस्त नया परिवार फिर बनाने जा रहा था
अपने दिल को फिर से बहला रहा हूँ
वो मोज मस्ती शायद यहाँ भी हो पर
यहाँ ना कोई प्यार ना कोई परिवार
मतलब से मतलब रखता है
यहाँ हर एक इंसान दुनिया मानो मतलबी सी है
इसका एहसास कॉलेज मे आकर पता चला
फिर सोचा इससे अचछा तो नवोदया था
काश वो दोस्त आज भी मिल जाते
दिल में फिर से नवोदया के फूल खिल जाते
वो नवोदया ही अच्छा था… !!!

वो नवोदया ही अच्छा था !!!


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