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वो नवोदय के दिन आज याद आते है !!!

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06 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  141 Views
वो नवोदय के दिन आज याद आते है !!!

वो कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना
अपने बाल खुद न काढ पाना
पी टी शूज को चाक से चमकाना
वो काले जूतों को पैंट से पोछते जाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …
वो बड़े नाखुनो को दांतों से चबाना
और लेट आने पे मैदान का चक्कर लगाना
वो prayer के समय class में ही रुक जाना
पकडे जाने पे पेट दर्द का बहाना बनाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

वो टिन के डिब्बे को फ़ुटबाल बनाना
ठोकर मार मार उसे हाऊस तक ले जाना
साथी के बैठने से पहले बेंच सरकाना
और उसके गिरने पे जोर से खिलखिलाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

गुस्से में एक-दूसरे की कमीज पे स्याही छिड़काना
वो लीक करते पेन को बालो से पोछते जाना
क्लास में सुतली बम पे अगरबती लगा छुपाना
और उसके फटने पे कितना मासूम बन जाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

वो Games Period के लिए Sir को पटाना
Unit Test को टालने के लिए उनसे गिडगिडाना
जाड़ो में बाहर धूप में Class लगवाना
और उनसे रात की सब्जी की बातें सुनते जाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

वो Exam से पहले गुरूजी के चक्कर लगाना
बार – बार बस Important पूछते जाना
वो उनका पूरी किताब में निशान लगवाना
और हमारा पूरे Course को देख चकराना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

वो Annual Day पार्टी के दिन पेस्ट्री समोसे खाना
और जूनियर लड़को को ब्रेक डांस दिखाना
वो टाइटल मिलने पे हमारा तिलमिलाना
वो साइंस वाली मैडम पे लट्टू हो जाना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …

वो मेरे नवोदय का मुझे यहाँ तक पहुचाना
और मेरा खुद में खो उसको भूल जाना
मेरा नवोदय में किसी परिचित से टकराना
वो जवान गुरूजी का बूढ़ा चेहरा सामने आना
ऐ मेरे नवोदय मुझे जरा फिर से तो बुलाना …


@पंकज चौरे नवोदयन
ज. न. वि. होशंगाबाद
2012-2019

वो नवोदय के दिन आज याद आते है !!!


Dedicated to
All Navodayans Friends.

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