Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Equality

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08 -Jan-2022 Avinash Kumar Woman Poems 0 Comments  51 Views
Equality

फरक क्या? ना पूछूँ नाम तो धरम क्या? जो पूछे जात को ये भेद क्यूं? हैं इंसान तो देखों ना, तुम भी संतान हो । आबरूँ से हैं पहचान तो, ताकते क्यों लिबास हों? समानता हैं स्वीकार तो, सम्मान के बेशक हकदार हो ।

क्यूँ सुरक्षित नहीं अब नारी है

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01 -Jan-2022 barish Woman Poems 0 Comments  24 Views
क्यूँ सुरक्षित नहीं अब नारी है

क्यूँ सुरक्षित नहीं अब नारी है, क्यूँ पुरुष बन गया अब इतना अत्याचारी है, लड़की घर से अब अकेली निकल नहीं सकती, क्यों ये घटिया सोच हमारी अब बदल नहीं सकती, क्यूँ इंसानियत पर आखिर हैवानियत भारी है, आखिर क्यूँ सुरक्षित न

जो इज़्ज़त ना दे नारी को उसे जीने का अधिकार नहीं..

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17 -Dec-2021 Deepak Tomar Woman Poems 0 Comments  81 Views
जो इज़्ज़त ना दे नारी को उसे जीने का अधिकार नहीं..

खेल रही थी छोटी बिटिया अपने घर के आँगन में, अंदर बैठी खिला रही माँ बेटे को दामन में, दिखा खिलौना उसको घर के बाहर बुलाया गया होगा, किसी सुनसान जगह पर फिर उसको ले जाया गया होगा, और नापाक इरादो से उस पर वार किया गया होगा

पढी लिखी लडकी रोशनी घर की

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09 -Dec-2021 Swami Ganganiya Woman Poems 0 Comments  72 Views
पढी लिखी लडकी रोशनी घर की

पढ़ी लिखी लड़की पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की जिधर भी जाए घर को रोशन करती एक नहीं वो कितने घरो का मान बढ़ाएं मन में है लाखो राज वो उन्हें दबाये बँधी है वो समाज के अनेक बंधनों में फिर भी वो घर का हर फर्ज निभाये रोशन उससे

हां मैं एक कामकाजी महिला हूं

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01 -Oct-2021 Pushplata Kourav Woman Poems 0 Comments  103 Views
हां मैं एक कामकाजी महिला हूं

हाँ मैं एक कामकाजी महिला हूं दिल में दबाए कुछ सपने हूं गृहस्थी और ऑफिस के बीच डोलती एक नैया हूं हाँ मैं एक कामकाजी महिला हूं। चट्टानों सी मजबूती और कोमलता का एक नमूना हूं खाने में स्वाद और दफ्तर में सराहना खोजते

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