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Yaadein Chitthi Ki

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12 -Sep-2016 Bas Deo Sharma Memories Poems 0 Comments  355 Views
Bas Deo Sharma

वो बीते दिन भी क्या दिन थे
जब डाक से चिट्ठी आती थी
जाने वो चिट्ठी कहाँ गई ,जो
अपनों की खबर सुनाती थी

जिस घर में चिट्ठी आती थी
माहौल बदल कर जाती थी
रिश्तों की संजीवनी बन कर
उनको जीवंत बनाती थी

बहुत दूर पगडंडी पर जब
पोस्टमैन दिख जाता था
खिल उठते थे चेहरे उनके
जिनकी चिट्ठी वह लाता था

फौजी की बूढ़ी अम्मा की
आँखों में चमक आ जाती थी
कब बेटा छुट्टी पर आयेगा
उसकी चिट्ठी ही बतलाती थी

परदेशी पिया की प्यारी गोरी
चिट्ठी को सीने से लगाती थी
विरहा की तपती अग्नि पर
मानों ठंडक पड़ जाती थी

साजन की चिट्ठी से गोरी
कई दिन तक बतियाती थी
खुद से ही कुछ कहती रहती
घूंघट में बहुत शरमाती थी

कोई ऐसी भी चिट्ठी आती थी
प्यार का दिया जलाती थी
बहुत दिनों तक उसकी ख़बरें
आँखों में चमक जगाती थी

एक चिट्ठी ऐसी भी होती थी
जो पीली चिट्ठी कहलाती थी
वह रिश्ते की पुष्टि करती थी
शादी की तिथि बतलाती थी

चिट्ठी बेशक जिसकी भी हो
राम- राम सभी को आती थी।
रिश्तों का शहद टपकता था
और महक प्यार की आती थी।

अब शादी के कार्ड ही आते हैं
बस जगह, तारीख बतलाते है
और जितने मंहगे होते हैं
उतना ही अहंकार दरशाते हैं

अब चिट्ठी जबसे लुप्त हुई
एक ख़बर नेट पर आती है
मोबाइल फोन की कॉलर धुन
अब मैसेंजर ऐप बतलाती है

वो प्रेम-पगी सी चिट्ठी मानों,
दो दिलों का दर्पण होती थी
पढ़ कर आँखें भर आती थीं
वो प्यार का अर्पण होती थी



Dedicated to
Remembering old era of Letter

Dedication Summary
This poem describe the memories of letter's day. At that time there was not advance technology like mobile, telephone, emails and people were used hand written letters to send there messages.

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