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यमलोक मे कोहराम

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08 -Apr-2020 RAHUL VERMA Natural Disasters Poems 0 Comments  604 Views
यमलोक मे कोहराम

यम लोक मे चिन्ता छाई
प्रथ्वी लोक मे महामारी आई
कोरोना ने कहर बरपाई
तीनो लोक मे चिन्ता छाई

यमदूतों ने किया हंगामा
कमीशन का रखा पैमाना
हाथ जोड़ कर रहे विनती
यमराज अब हमसे न बनती

किन किन को अब लेकर आऐं
किस किस की अब पंक्ति बनाऐं
ईटली अमरीका या चीन मे जाऐं
कहां कहां तक हाथ बढाऐं

देख यमदूतों की ये लाचारी
चित्रगुप्त भी हुआ अब भारी
बंद कर दी पोथीयां सारी
कहा अब यही होगा हितकारी

हाथ जोड़ यमराज से बोला
नहीं रख सकता कर्मो का लेखा
एक आदमी पे काम का बोजा
रख लो कोई अब लेखक दूजा

यमराज ने फिर सभा बुलाई
घुटी ग्यान की सबको पिलाई
इंसानो ने जब ललकारी प्रभुताई
होता यही हश्र है भाई

सभी जानवर मार रहे चितकारी
पंछी भी हो गऐ लाचारी
पेड़ पोधों को नहीं देने जीते
पानी भी दूषित कर देते

सूरज ढंग से चमक नहीं सकता
पवन ढंग से चल नही सकता
पर्वत सारे रो रहें हैं
सागर सारे सो रहें हैं

आसमां मे चल रहे अंगारे
देखो मिसाईलों के हाहाकारे
परमाणू के अंबार लगाकर
ईंसान रहेगा धरती मिटाकर

अत्याचारी मानवो को जानो
मेरे साथीयों हार ना मानो
मिटनी है अब ईनकी अतिचारी
हिसाब देगा अब हर अपचारी

सुन यमराज की अम्रतवानी
चित्रगुप्त ने काम की ठानी
यमदूत भी फिर काम पे लोटे
कर्म इंसानो के ही खोटे

--राहुल वर्मा



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