ये चाची मासी क्यूं नहीं बन पाती ?

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01 -Jul-2017 Ashwani Kumar Family Poems 0 Comments  527 Views
Ashwani Kumar

एक बात अक्सर, मेरे ज़हन में बेवजह है आती,
बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ?

भले चाची अपने दिल में दफ़न, हर राज़ खोल दे,
अपने बच्चों से बढ़ कर, जेठानी के बच्चों पर प्यार उडेल दे,
चाची चाह कर भी बच्चों के मन में, घर नहीं कर पाती,
बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ?

मासी के वास्ते बच्चे व्याकुल होते हैं, जब मौसम भी सर्द होता है,
चाची की तकलीफ देख कर भी, कंहा बच्चों को दर्द होता है,
मासी की चहचहाहट के आगे, चाची की आह है दब जाती,
बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ?

मासी की याद तो, बच्चों को हर हफ्ते सताती है,
चाची तो जतन महज़, त्योहारों पर ही याद आती है,
अहमियत की दूरबीन से, ये चाची कंहा है नज़र आती,
बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ?




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