Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ये ज्ञान

0
17 -May-2017 Neha Sonali Agrawal Education Poem 0 Comments  2,091 Views
Neha Sonali Agrawal

आकाश सा है अनंत,
सागर सा ये गहरा,
सच्चे मन में निहित,
ज्ञान का विशाल बसेरा.
न कोई शुरुआत इसकी,
न होता इसका अंत,
सीमाओं का आधीन नहीं,
ये है ज्ञान रूपी महंत.
निरंतर चलता रहे ये,
जैसे नदिया की धारा,
किसी ने न देखा,
इस ज्ञान का किनारा.
ये न करे कोई भेदभाव,
सब के लिए एक समान,
उम्र का ये मोहताज नहीं,
मोह माया से है अंजान.
चाहें हों बीतें तजुर्बे,
या हो कोई मोड़ नवीन,
बोध करे रोशन हर पथ,
बनाए हर अनुभव प्रवीण.
जीवन की हों जटिलता,
या हो कठिन वक़्त,
ज्ञांन का सबल साथ,
रखता विश्वास सशक्त.
ज्ञान की स्याही से,
होती भविष्य की रचना,
अग्रसर होता ये समाज,
गा कर ज्ञान की वंदना.
मानवता का हो मार्गदर्शन,
या सृष्टि का नव निर्माण,
ज्ञान की कमान से निकले,
ये अनमोल जीवंत बाण.
जीवन रथ पर हैं सवार,
धर्म, कर्म और मान,
केवल ज्ञान है वो सारथी,
जो विजय का दे वरदान.
तो चलें उस राह पर,
जहाँ ज्ञान की मिले पनाह,
अलंकृत करें इस जीवन को,
अज्ञानता को कर दें फ़ना.



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017