Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ये जो हैं...सपने

0
विनोद सिन्हा-

"ये जो हैं...सपने "

सपने...ये जो हैं सपने...
झूठे ही सही पर सच के करीब होते हैं
हर खुशी को समेटे नैनों तले,
गहरे जज्बात लिए होते हैं |
कुछ फर्क नही पड़ता,
आँखें खुली या बंद हों
इनका आना तय है
वजह चाहें हों ना हों |
ये आँखों में हैं बसते,
और हम इनसे जुदा नही...
कोई भी सपना यूँ ही,
बेमतलब तो नही आ सकता?
इनमें छुपी होती है,
हमारी सच्चाई...
बीते हुए कल की दास्तान...
और आने वाले कल की झलक...
कुछ सपने छोड़ जाते हैं
गहरे भँवर में फंसा के...
जहाँ सोचने पर मजबूर होना पड़ता है,
कहीं सच ना हों जाए ये सपने...
और कुछ आते हैं
उम्मीद का दामन पकड़े,
और हम चाहते हैं कि काश !
सच हो जाए ये सपने...
बेतरतीब आते हैं ये सपने...
बड़े अजीब होते हैं ये सपने...
और कभी-कभी इन्हें पूरा
करने की शर्त,
हमें ले जाती है बहुत दूर
जहाँ मिलता है सिर्फ दर्द का सहारा |
सभी आँखें इन्हें देखती है,हक भी है,
पर कितनों को स्वीकार है उन फासलों को
मिटाने में जो सपने और उसके सच्चाई के बीच हैं???
शायद इसीलिए कुछ सपने
बस रह जाते हैं बनकर एक और सपने...

विनोद सिन्हा-"सुदामा"



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017