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ये माँ ….

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12 -May-2018 Saroj Mothers Day Poem 0 Comments  683 Views
Saroj

ये माँ ….

ये माँ क्या क्या कहु मैं तेरे बारे में,
न जो कैह पाना इतना आसान है,
न जो बता पाना इतना सरल है,
मैं बताउंगी वही जो मेरे अंदर है,
किये है जो तूने मेरे लिए..आज तक वो,
जो न कभी किसी ने किया है…
नो महीने तक पैहले अपने खून से सिचा मुझे,
फिर अपने दर्द को भुला कर जन्म दिया मुझे,
जब आई मैं इस दुनिया में..
अपने सारे पल मुझ पे कुर्बान कर दिया,
हर पल नजर बिठाये रखी मुझ पर तूने,
अपने सीने से लगा कर हरदम पास रखा,
सब की नजर से बचा के रखा तुमने,
कभी खाना खिलाना कभी नैहलाना,
कभी एक ही रोने की आवाज पे दौड़े चले आना,
पल भर में देखा है तेरा मैंने…
चलना सिखाया मुझे हाथ पकड़ के मेरा,
बोलना सिखाया तोतली बोली बोल कर तूने,
मेरी ही मुस्कान से तू भी मुस्कुराती थी,
मेरी हर जिद को तू पूरा करती थी,
सारी सारी रात भी तूने जाग कर बिताया है,
मेरे सोने के बाद ही तू सोती थी,
मेरे लिए तुमने दुनिया से भी लड़ी है,
मेरी खुशियों के लिए तुमने अपने दर्द भी छिपाया है,
मैं न होती इतनी मजबूत ,
अगर तुमने जो न मेरा हौसला बढ़ाया होता,
तेरे हर गुण को मैंने खुद में पाया है,
हा मैं हक़ से इस जन्म में क्या हर जन्म में कैह सकती हु,
तू मेरी “मईया” है और मैं तेरी बिटिया हु…



Dedicated to
My mother

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