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Ye Sham Mastani

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10 -Dec-2020 Ashok Bhinde Nature Poem 0 Comments  361 Views
Ye Sham Mastani

ठंडी ठंडी वाली शाम में
सूरज को ढलते देखा है
सूरज के हल्के छाये में
पंछियों को उड़ते देखा है
हरे भरे मैदानों में
गायों को चरते देखा है
इस आसमान में वापस
पंछियों को घर जाते देखा है
इस ठंडी शाम में
लोगो को बाहर घूमते देखा है
इन पंछियों के साथ आसमान में
आधुनिक टेक्नोलॉजी से विकसित
एयरप्लेन को उड़ते देखा है
हरे भरे पेड़ो पर
कोहरे को छाते देखा है
पंछियों की मधुर ध्वनि के साथ
पतंगों को उड़ते देखा है
आखिरकार
सूरज को जाते हुए देखा
और
कोहरे को आते हुए देखा
बस यही सब
आज मैंने
। प्रकृति में है देखा



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