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Ankita Singh ( Ankita Lucknowist )

List of popular and best poems written by Ankita Singh ( Ankita Lucknowist )

Ankita Singh ( Ankita  Lucknowist )
Ankita Singh ( Ankita  Lucknowist )
Ankita Singh ( Ankita Lucknowist )

कहां डाले झूला बाबा !!

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17 -Jul-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Miscellaneous Poems 0 Comments  756 Views
कहां डाले झूला बाबा !!

कहां डाले झूला बाबा,
ना निमिया ,ना अम्वा ,
घर के चौबारों पर

इस तरह खिल कर !!

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11 -Jul-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Flower Poem 0 Comments  1,118 Views
इस तरह खिल कर !!

इस तरह खिल कर ,
मेरे मन को भरमा रहे हो तुम ,
जैसे पतझड़ी फिज

सावन

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10 -Jul-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Season Poems 0 Comments  412 Views
सावन

मेघ गाये मल्हार बावरें ,
बरसे आज सावनवा !
खिली चांदनी मोरे

अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला !

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07 -Apr-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Miscellaneous Poems 0 Comments  1,182 Views
अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला !

अनन्त पतझड सा मेरा हृदय हो चला ,
राह बाहरो की उसको दिखाते

गौरी माँ (वधू परछन गीत)

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20 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) God Poems 0 Comments  644 Views
गौरी माँ (वधू परछन गीत)

नंदी पर होकर सवार,
आई शिव नार ,
भोले बाबा की नगरिया l

तन सो

मैं अधूरी

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14 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Miscellaneous Poems 2 Comments  1,770 Views
मैं अधूरी

मैं अधूरी ,
अधूरा है चादँ ।
तारों की रहगुजर में ,
सूना है च

खग की आत्मानुभूति

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13 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Birds Poem 0 Comments  751 Views
खग की आत्मानुभूति

काट लिए सब वृक्ष मनुज ने,
विपदा डाली मेरे सर,
कैसे बनाऊ नी

असभ्य लंगूर

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13 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Save Trees Poems 0 Comments  824 Views
असभ्य लंगूर

जंगल के सारे लंगूर ,
खाते थे मीठे अंगूर ,
कितुं मनु पुत्रो

सन 90 का बचपन

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10 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Childhood Poems 0 Comments  1,232 Views
सन 90 का बचपन

घर की मुंडेर पर ,
पंछी सा चहचहता था बचपन I

आंगन की दहलीज पर

माँ तुम बिल्कुल वसंत जैसी हो!

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08 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Mothers Day Poem 0 Comments  1,351 Views
माँ तुम बिल्कुल वसंत जैसी हो!

चिरागों में,
रोशनी अनंत जैसी हों I
माँ तुम बिल्कुल ,
वसंत

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