Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Pankaj Chourey

List of popular and best poems written by Pankaj Chourey

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नवोदय मे पढ़ा करते थे (Navodaya Wali Baatein)

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23 -Nov-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  544 Views
नवोदय मे पढ़ा करते थे (Navodaya Wali Baatein)

नवोदय मे पढ़ा करते थे
मस्त मगन रहा करते थे।
ना धूप की चिंता

नवोदय वालो को काबू में कैसे करे।

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25 -Jul-2020 PANKAJ CHOUREY Memories Poems 19 Comments  18,544 Views
नवोदय वालो को काबू में कैसे करे।

1. अच्छा रहेगा कि गूगल पर ऐसा कोई चीज सर्च न करे।
वरना गूग

|। नवोदय : एक याद ।| by PANKAJ CHOUREY NAVODAYAN

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19 -Mar-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 1 Comments  1,248 Views
|। नवोदय : एक याद ।| by PANKAJ CHOUREY NAVODAYAN

हां , मैं थोड़ा लेट आया था जन्नत में
शुरू में बहुत अजीब लगा

हम नवोदय से क्यो निकल गए

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02 -Mar-2020 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  747 Views
हम नवोदय से क्यो निकल गए

खामोशी के पन्नो पर नवोदय की याद लिख दे ,

इन अनसुनी राहों प

वो नवोदया ही अच्छा था !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  678 Views
वो नवोदया ही अच्छा था !!!

वो नवोदया ही अच्छा था
ये जवानी हार गयी नवोदया के दिन ही अच

नवोदय के वो हर एक पल जब हम साथ हुआ करते थे !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  851 Views
नवोदय के वो हर एक पल जब हम साथ हुआ करते थे !!!

याद आते हैं वो पल ,
जब नवोदय के हर एक पलों मे साथ थे यार
जब

मेरा नवोदय का अनुभव

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17 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Memories Poems 0 Comments  1,116 Views
मेरा नवोदय का अनुभव

मेरा नवोदय

मासूम-सा चेहरा, घर की यादें, जरूरत की चीजों से

राह देखी थी कब से नवोदय वापस जाने की

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29 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  428 Views
राह देखी थी कब से नवोदय वापस जाने की

Raah dekhi thi is din ki kabse,
Aage ke sapne saja rakhe the naajane kab se.
Bade utavle the yahaan se jaane ko ,
Zindagi ka agla padaav paane ko .

काश हम एक नवोदयन होते।।

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11 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  907 Views
काश हम एक नवोदयन होते।।

काश हम एक नवोदयन होते।।

काश हम एक नवोदयन होते।।
हमारी भी

वो दिन मैं कैसे भूलूं?

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10 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Memories Poems 0 Comments  996 Views
वो दिन मैं कैसे भूलूं?

वो दिन मैं कैसे भूलूं?
जिस दिन तुझको पाया था।
यूं तो थे हम

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