Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Pankaj Chourey

List of popular and best poems written by Pankaj Chourey

Pankaj Chourey
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वो नवोदया ही अच्छा था !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  189 Views
वो नवोदया ही अच्छा था !!!

वो नवोदया ही अच्छा था
ये जवानी हार गयी नवोदया के दिन ही अच

नवोदय के वो हर एक पल जब हम साथ हुआ करते थे !!!

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29 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  138 Views
नवोदय के वो हर एक पल जब हम साथ हुआ करते थे !!!

याद आते हैं वो पल ,
जब नवोदय के हर एक पलों मे साथ थे यार
जब

मेरा नवोदय का अनुभव

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17 -Dec-2019 PANKAJ CHOUREY Memories Poems 0 Comments  86 Views
मेरा नवोदय का अनुभव

मेरा नवोदय

मासूम-सा चेहरा, घर की यादें, जरूरत की चीजों से

राह देखी थी कब से नवोदय वापस जाने की

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29 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  114 Views
राह देखी थी कब से नवोदय वापस जाने की

Raah dekhi thi is din ki kabse,
Aage ke sapne saja rakhe the naajane kab se.
Bade utavle the yahaan se jaane ko ,
Zindagi ka agla padaav paane ko .

काश हम एक नवोदयन होते।।

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11 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  217 Views
काश हम एक नवोदयन होते।।

काश हम एक नवोदयन होते।।

काश हम एक नवोदयन होते।।
हमारी भी

वो दिन मैं कैसे भूलूं?

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10 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Memories Poems 0 Comments  217 Views
वो दिन मैं कैसे भूलूं?

वो दिन मैं कैसे भूलूं?
जिस दिन तुझको पाया था।
यूं तो थे हम

नवोदय की होली

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09 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Holi Poems 0 Comments  178 Views
नवोदय की होली

अब जब होली आती है ,तो उसका मतलब बस छुट्टी है !
होली जैसी होल

बस एक बार वापस लौटने का मन करता है

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06 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Student Poems 0 Comments  646 Views
बस एक बार वापस लौटने का मन करता है

बस एक बार वापस लौटने का मन करता है..
आज हर वो दिन जीने को मन

वो नवोदय के दिन आज याद आते है !!!

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06 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  280 Views
वो नवोदय के दिन आज याद आते है !!!

वो कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना
अपने बाल खुद न काढ पाना
पी ट

हसींन पल जुदा हुए ( नवोदय की याद में )

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03 -Nov-2019 PANKAJ CHOUREY Friendship Poems 0 Comments  153 Views
हसींन पल जुदा हुए ( नवोदय की याद में )

जब चमन उजर गया मेरे जहाँ से
तब कुछ नज़र नही आया मुझे वहां पे

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